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श्री इच्छापूर्ण बाला जी धाम, जालंधर

जय श्री राम

जय श्री बाला जी

जय श्री बाला जी धाम जालंधर की कथा



श्री बाला जी महाराज का पिंडी रूप में धरती पर प्रकट होना |

जालंधर शहर पंजाब राज्य का एक विशाल व्यावसायिक शहर है| वैसे तो यह शहर खेलों का सामान बनाने के लिए प्रसिद्ध है, साथ ही साथ यह शहर अपने आप में पौराणिक ऐतिहासिक कथाएं समेटे हुए देवी देवताओं का शहर है|
जालंधर शहर का यह नाम जालंधर नामक राक्षस का वध करने के बाद स्वयं भगवान शंकर द्वारा दिया गया है| उन्ही भगवान शंकर जी के अवतार हैं श्री बालाजी महाराज जिन्हों ने श्री मेंहदीपुर धाम, राजस्थान में स्वयं को पिंडी रूप में प्रकट किया|
जालंधर शहर में श्री बाला जी के भक्त अजय पुरी जी का निवास स्थान N.E. 213 अड्डा टांडा, जालंधर शहर में है| भक्त अजय पुरी जी ने बाला जी के गुणगान और प्रचार के लिए श्री इच्छापूर्ण बाला जी सेवा समिति (रजिस्ट.) का संगठन वर्ष 2009 में किया था| इस समिति की गतिविधियों में प्रमुख रूप से प्रत्येक मंगलवार को श्री बाला जी की चौंकी का आयोजन किया जाता है और रोज़ाना सुबह शाम भक्तों के संकटों का निवारण किया जाता है| चौंकी वाले स्थान पर श्री बालाजी की कृपा से भक्तों के लिए जगह छोटी होती गयी| इसी चिंता में भक्त अजय पुरी जी ने निर्णय लिया की दरबार को तोड़ कर बढ़ा करने का कार्य शुरू किया जाए और देखते ही देखते दरबार के साथ लगने वाले कमरों को तोड़ने का कार्य आरम्भ करवा दिया|
भक्त अजय पुरी जी के पुत्र राघव पुरी को श्री बाला जी महाराज ने अपने विशेष प्रतिनिधि के रूप में चुना और जिस वक्त खुदाई का काम चल रहा था बाला जी ने राघव पुरी को अपने आने का आभास पहले तो एक ख्याल रूप में करवाया| मगर जब वो नही समझ पाया तो प्रभु ने अपनी लीला रचते हुए उसे स्वयं खुदाई वाली जगह पर ला कर खड़ा कर दिया और माँ सरस्वती जी की कृपा से खुदाई करने वालों को आदेश दिया कि यह शिला वो आदरपूर्वक उसके हाथ में पकड़ा दें|
प्रभु बाला जी को शिला रूप में ग्रहण करते ही राघव पुरी को एहसास हुआ कि यह तो कोई विशेष शिला है क्योंकि इस शिला का वजन इसके आकर के अनुरूप ना हो कर कई गुणा ज़्यादा है| अत: उसने अपने दोनों हाथों में बड़े ही आदरपूर्वक शिला रूपी श्री बाला जी महाराज को ग्रहण किया और उत्साह से भरा हुआ अपने पिता भक्त श्री अजय पुरी जी को पुकारने लगा|
भक्त अजय पुरी जी सारी घटना को जानने के बाद प्रभु श्री बाला जी की इस अपार कृपा से उत्साहित हो गये| इस रहस्य को जानने के लिए दरबार में बैठ कर पाठ करने में मगन हो गये और प्रभु को पिंडी रूप में विराजमान होने की बात जानकर आश्चर्यचकित हो गये|
इस प्रकार श्री बाला जी महाराज ने स्वयं को पिंडी रूप में प्रगट करके जालंधर शहर को इस कलियुग में आने वाले समय में कष्टों के निवारण का माध्यम बना दिया|
इसके पश्चात श्री बाला जी ने अपने आने का प्रमाण अलग अलग भक्तों को अलग-अलग रूप में दिया|


श्री बाला जी का सपने में आ कर प्रमाण देना |

श्री बाला जी की पिंडी रूप में अवतार की खबर कुछ ही समय में पूरे जालंधर में फैल गई| भक्तों का प्रभु के दर्शनों के लिए लगातार आगमन होने लगा|
इसी बीच एक भक्त के मन में दर्शन करने के पश्चात यह ख्याल आ गया कि क्या यह सचमुच में बाला जी हैं? अन्यथा कहीं यह शिला पत्थर मात्र तो नही| यह विचार मन में लेकर वह भक्त अपने घर को चली गई|
रात्रि में निंद्रा की गोद में जाने के पश्चात दिन में देखी हुई पिंडी उनकी आँखों के सामने आ गई और प्रभु ने अपनी लीला शुरू करते हुए सबसे पहले उस पिंडी स्वरूप में से स्वयं की पूंछ प्रकट की और फिर अपना शरीर और अंत में मुँह प्रकट करके उस भक्त को बताया कि यह पिंडी मेरी है और मैं भक्तों के संकटों का निवारण करने के लिए विशेष रूप से जालंधर में आया हूँ|
प्रभु की इस लीला के चलते वो भक्त चाहते हुए भी अपनी आँखें ना खोल पाई और लीला समाप्त होते ही रात्रि में ही उठ कर बैठ गई और रोते हुए प्रभु कृपा का स्मरण करते हुए सुबह का इंतज़ार करने लगी|
सुबह होते ही दरबार में आकर उस भक्त ने अपनी ग़लती की क्षमा नाक रगड़ कर माँगी और प्रभु के दर्शन की कृपा का धन्यवाद भी किया|
ऐसे हैं हमारे श्री बाला जी महाराज जो अपने भक्तों से हुई भूल को क्षमा भी करते हैं और कृपा वर्षा भी करते हैं|


साप्ताहिक चौंकी में प्रभु कृपा |

श्री इच्छपूर्ण बाला जी सेवा समीति (रजिस्ट.) पंजाब की और से प्रत्येक मंगलवार को श्री बाला जी महाराज की चौंकी का आयोजन किया जाता है| प्रभु की कृपा साक्षात और अदृश्य रूप से चौंकी में होती है| अक्सर भक्त जन इस कृपा को महसूस करते हैं और अपने कष्टों को आकस्मात ही समाप्त पाते हैं|
एक भक्त के अनुसार वो श्री बाला जी महाराज की चौंकी का आनंदे ले रहे थे| भक्त की आँखें बंद थी| वो प्रभु श्री राम जी की "राम नाम धुन" में मगन थे| अचानक ही उस भक्त को अनुभव हुआ कि उसके आस पास एक अदृश्य घेरा बन गया है| एक आलौकिक रोशनी चमक रही है| देखते ही देखते श्री बाला जी महराज ने अपने गुर्ज से उस भक्त के सिर पर प्रहार किया और कोई संकट रूपी दुष्ट आत्मा उसके शरीर से बाहर निकल कर उस अदृश्य आलौकिक घेरे से बाहर निकल गई| तत्पश्चात वो बार बार कोशिश करने पर भी उस अदृश्य घेरे को न भेद पाई| ऐसे पल भर में ही बाला जी ने अपने भक्त के कष्ट को समाप्त कर दिया|


भैरों बाबा द्वारा कैंसर रोग का ईलाज |

भैरों बाबा जी की जालंधर स्थित श्री बाला जी धाम में भक्तों पर विशेष कृपा है|
प्रभु भैरों बाबा जी ने साक्षात अपनी हाजरी में अपने भक्तों को कुछ विशेष नाम की कृपा करी है| अपने भक्तों के ही नहीं अपितु उनके परिवार के कष्टों के निवारण के लिए प्रभु अकस्मात ही अपनी कृपा वृषा करते हैं|
एक साय: अकस्मात ही प्रभु श्री भैरों बाबा जी का साक्षात्कार हुआ और प्रभु ने बताया के उनके प्रिय सेवादार भक्तों में से एक भक्त की बहन को "कैंसर" का रोग है| उसे जल्दी से जल्दी इस दरबार में बुला लो| प्रभु के भक्त को उनका संदेश पल भर में ही दे दिया गया|
सेवादार भक्त ने अपनी उस बहन को जालंधर में आने को कहा जो कि मुंबई में रहती थी| जल्दी ही वो जालंधर धाम में प्रभु श्री बाला जी एवं श्री भैरों बाबा जी के दर्शन को आ गई|
दरबार में आकर बहन जी ने अपनी व्यथा सुनाई कि वो अपने रोग से इस हद तक ग्रस्त है कि न तो वो कुछ खा सकती है क्योंकि कुछ भी खाते ही उन्हें "उल्टी" हो जाती है और न ही वह रात-रात भर सो पाती है| प्रभु धाम में अपनी व्यथा बताते ही महाराज भैरों बाबा जी ने अपनी विशेष कृपा करी और अपने अनन्य भक्त को दरबार पर बुला लिया क्योंकि उसकी शरीर में प्रवेश करके तो प्रभु ने अपनी लीला करनी थी और संकट का ईलाज करना था|
देखते ही देखते श्री भैरों बाबा जी का साक्षात हुआ और उस भक्त का ईलाज शुरू हो गया| प्रभु कभी उस भक्त के सिर को पकड़ते तो कभी माथे को, फिर पीठ को तो कभी पेट को| सभी भक्तजन प्रभु की इस विशेष कृपा को देख रहे थे| आधे घंटे तक चली इस प्रक्रिया में प्रभु ने जो करा वो तो वो ही जाने मगर जाते-जाते बोल गये कि ये भक्त जल्द ही ठीक हो जाएंगी| इसे प्रभु श्री बाला जी महाराज का जल, बबुत और ईलायची का सेवन करवाओ और सवा महीने लगातार सुबह शाम इस दरबार पर हाजरी दे तत्पश्चात मेहन्दीपुर धाम (राजस्थान) में तीन दिन की हाजरी दें तो इसे इसके कष्ट से मुक्ति मिल जाएगी|
प्रभु कथन अनुसार उन्हें वो सब सामग्री उपलब्ध करवा दी गई| उस रात वो बहन जी ने घर जा कर भर पेट खाना भी खाया और रात भर पूरी नींद भी ली| पूरा सवा महीना वो सुबह शाम प्रभु की वन्दना करने के लिए धाम में आती रही और उनका संकट-कष्ट धीरे धीरे कटता गया| प्रभु कथन अनुसार आज वो पूरी तरह सवस्थ है और अपने परिवार संग अपना जीवन व्यतीत कर रही हैं|

जय श्री राम |

जय श्री बाला जी ||